SHIVPURI NEWS - राजा नल का नेजा सबसे पहले चढता है मॉ बलारी पर ,लाखो लोगो के पहुंचने की उम्मीद

Bhopal Samachar

शिवपुरी। शिवपुरी मुख्यालय से लगभग 23 किलोमीटर माधव टाइगर रिजर्व में स्थित  मां बलारी का मेला आज सप्तमी से शुरू हो गया है। सप्तमी के दिन सबसे पहले मॉ बलारी  राजा नल का नेजा लेती है,इस कारण सप्तमी की अलसुबह राजा नल का नेजा चढ़ाया जाता है। यह वर्षो पुरानी परंपरा है। आज भी इस इस परंपरा का निर्वहन किया जाता है। देवी उपासक राजा नल का नेजा मां बलारी सबसे पहले लेती है इसी परंपरा को आज भी नरवर के लोगों ने जिंदा रखा है। नरवर का जनमानस हजारो की संख्या में नरवर से जंगल के रास्ते मां बलारी पहुंचते है और नेजा चढाते।

मेला प्रारंभ होने से पूर्व पुलिस और प्रशासन ने रात्रि में मेला परिसर का जायजा लिया। जिलाधीश रविंद्र कुमार चौधरी, एसपी अमन सिंह राठौड़ और डीएफओ प्रियांशी सिंह ने मंदिर में माँ बलारी के दर्शन किए और मेला परिसर सहित मेले में आने वाले भक्तों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को निर्देशित किया।

रात्रि से ही भक्तों का मेले में आने का सिलसिला शुरू हो गया। जिन भक्तों की मन्नतें पूरी हुईं, वे पेंड़े भरकर माँ के दर्शन के लिए जंगल के बीच से गुजर रहे हैं। उन्हें न तो जंगली जानवरों का भय है और न ही किसी तरह का डर, वे बिना डरें और सहमे आस्था के साथ मेले में पहुंच रहे हैं।

बलारी माता का मंदिर घनघोर जंगल में स्थित है, जहां खुलेआम बाघ और तेंदुए विचरण करते हैं, लेकिन माँ के भक्त बिना किसी डर के मंदिर पर पहुंचने लगे हैं। आज से दिन-रात भक्तों का आवागमन जारी रहेगा। भक्तों को मंदिर तक लाने-ले जाने के लिए बसों के साथ-साथ कई निजी एवं भाड़े के वाहन भी लगे हुए हैं। इसके अतिरिक्त कई स्थानों से निःशुल्क बसें भी संचालित की जा रही हैं।

फूलों से सजाया माँ का दरबार लगाए छप्पन भोग
कल दिन भर माँ के दरबार में दर्शनों के लिए भक्तों के पहुंचने का सिलसिला चलता रहा। रात में भी भक्त पैदल यात्रा कर मंदिर तक पहुंचने के लिए घरों से निकले और आज सुबह भक्तों का मंदिर परिसर में तांता लग गया। सुबह चार बजे से माँ के दर्शनों का सिलसिला शुरू हुआ। इस दौरान मंदिर को फूलों से सजाया गया। वहीं माँ को 56 भोग का प्रसाद अर्पित किया गया।

पैदल जाने वाले भक्तों को हो रही परेशानी
शिवपुरी से बांकड़े हनुमान तक का रास्ता खराब होने से पैदल और पेंड़े भरकर जाने वाले भक्तों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने मेले शुरू होने से पूर्व उस रास्ते को समतल तक नहीं कराया, जबकि बलारपुर मंदिर तक जाने के लिए यही एक रास्ता शहर से गुजरता है।

वाहनों से हो रही वसूली
पार्क प्रबंधन ने वाहनों के जंगल क्षेत्र में प्रवेश पर शुल्क तय कर दिया है, लेकिन वाहनों सहित आने वाले भक्तों के लिए कोई पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं की गई हैं। दो पहिया वाहनों के लिए पार्क प्रबंधन ने 50 रुपए निर्धारित किए हैं, यहीं तीन पहिया वाहनों से 80 रुपए, चार पहिया वाहनों से 150 रुपए और बस सहित अन्य बड़े वाहनों से 450 रुपए लिए जा रहे हैं। लेकिन रास्ते में बड़े-बड़े गड्ढे और संकेतक न लगे होने से वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जंगल के बीच पैदल जाने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं, जबकि पार्क प्रबंधन का दावा है कि उन्होंने पैदल जाने वाले भक्तों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। मगर हकीकत में ऐसा कुछ दिखाई नहीं देता है।