शिवपुरी। निजी स्कूलों के कॉपी किताबों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने जिले में पुस्तक मेले का आयोजन कराया गया है। प्रशासन मनमानी तो खत्म नहीं कर सका। अभिभावकों को 5 प्रतिशत से डिस्काउंट नहीं दिया वही निर्धारित दुकानदारों पर ही निर्धारित स्कूलों की पुस्तक मिली,इससे दुकानदारो की मोनोपॉली जारी रही,सरकारी स्थान पर सरकार के अधिकारियों के दिशा निर्देश ओर मॉनिटरिंग में लगाए गए पुस्तक मेले में जीएसटी चोरी का मामला भी संज्ञान मे आ गया।
गुरुवार को शाम 4 बजे एसडीएम ने पड़ताल की तो वह सादा कट्टे पर दुकानदार पुस्तकें बेचते नजर आए। खास बात यह है कि एसडीएम को महज एक स्टेशनरी का पैड जीएसटी नंबर के साथ मिला। शेष पर तो नाम तक अंकित नहीं थे कि उपभोक्ता कहां से इन पुस्तकों को खरीद रहा है। जब एसडीएम और डिप्टी कलेक्टर ने मौके पर प्रकाशक ने बिल देखने चाहे तो कोई दिखा नहीं सका।
इसके बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्टेशनरी पर कार्रवाई के लिए भेजा तो दुकानदार ताला लगाकर रफू चक्कर हो गए। दरअसल पुस्तक मेले की शुरुआत से ही अभिभावकों की समस्या को मीडिया ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद अभिभावकों की शिकायत और खबरों में लोगों की परेशानी को देखकर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 2 में लगे मेले में शाम 4 बजे एसडीएम उमेश कौरव और डिप्टी कलेक्टर अनुपम शर्मा ने मौके पर पहुंचे तो लोग खाली बिल पुस्तक का दिखाते मिले।
अभिभावकों की इस समस्या पर जब उन्होंने पुस्तक विक्रय कर रहे भारती पुस्तक सदन और अन्य स्टेशनरी विक्रेताओं से जीएसटी नंबर और पब्लिकेशन के बिल मांगे तो कोई भी जवाब स्टेशनरी संचालक नाहीं दे सके। और तो और खाली बिल पर स्कूल किताबों को पेमेंट स्लिप देते नजर आए। इसके बाद एसडीएम ने पूछा कि आप पक्का बिल क्यों नहीं दे रहे हो और जीएसटी नंबर के साथ स्टेशनरी का नाम बिल बुक पर अंकित क्यों नहीं है। इसका संचालक जवाब नहीं दे सके। और एक-एक कर पुस्तक मेले से स्टेशनरी संचालक रफूचक्कर हो गए।
टीम पहुंची तो स्टेशनरी बंद मिली
एसडीएम उमेश कौरव ने बताया कि यह गंभीर लापरवाही और पुस्तक विक्रेताओं का गड़बड़झाला है कि वह अभिभावक को पुस्तकों का पक्का बिल तक नहीं दे रहे। इसलिए हमने स्टेशनरी संचालकों के यहां जाकर टीम से बिल लाने को कहा तो दुकानें बंद कर स्टेशनरी संचालक रफू चक्कर हो गए।
अब हम और गंभीर कार्रवाई करेंगे
हमें तो पुस्तक मेले में सिर्फ अशोक स्टेशनरी पर बिल पर जीएसटी नजर आया। शेष पर तो न मुझे और न ही डिप्टी कलेक्टर शर्मा जी को कोई पेड ऐसा मिला जिस पर पूरा डाटा अंकित हो। आखिर में स्टेशनरी संचालकों की हड़ताल कराई तो वह दुकानें बंद कर चले गए। अब हम और गंभीर कार्रवाई करेंगे। -
उमेश कौरव, एसडीएम शिवपुरी