SHIVPURI NEWS - अमर शहीद हमारी धरोहर है, इनको सम्मान देना हर भारतीय का फर्ज है,कैप्टन शर्मा

Bhopal Samachar
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शिवपुरी। मप्र इन्डियन वेटरन्स आर्गेनाजेशन सैनिक संगठन ने शहीद दिवस के अवसर पर शहीद तात्या टोपे समाधि स्थल पर शहीद राजगुरु ,सुखदेव , भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश शर्मा ने कहा कि "मुझे तन चाहिए,न धन चाहिए,बस अमन से भरा यह वतन चाहिए,जब तक जिंदा रहूं इस मातृभूमि के लिए इंकलाब जिंदाबाद। शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले , वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा । हम रहे ना रहे मां तेरा वैभव अमर रहे।"

अमर बलिदानियों को श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें याद किया गया। इस मौके पर अध्यक्ष महोदय ने कहा कि शहीद हमारी धरोहर हैं इनको सम्मान देना हर भारतीय का फर्ज है । देश को आजाद करवाने में तथा आजादी को कायम रखने में जिन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए , अपना सर्वोच्च बलिदान  दिया ।  जो सैनिक सीमा की सुरक्षा के लिए दिन-रात खड़े रहते हैं , आज हम उन्हीं की बदौलत , हम आप चैन की नींद सोते हैं।

कैप्टन चन्द्र किशोर चतुर्वेदी ने कहा, जो राष्ट्र शहीदों का सम्मान करना भूल जाता है , उसे गुलाम होने में देर नहीं लगती । अतः ऐसे कार्यक्रम होना चाहिए जिससे हमारे बच्चों को, देशवासियों को प्रेरणा मिले। हमारे स्कूलों,कॉलेजों में शहीदों के पाठ होना चाहिए जिससे मालूम पड़े कि देश सेवा , सर्वोच्च सेवा होती है।

इस अवसर पर उपाध्यक्ष अशोक कुमार शर्मा ने कहा कि देश में जागरूकता लाने की जरूरत है। हमारी कथनी और करनी अलग हो रही है ,स्वार्थी लोगों का जमावड़ा है। नेशन फर्स्ट की भावना दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही है।

वेटरन कैलाश सिंह जादौन ने युद्ध काल के अपने अनुभव बताते हुए कहा कि जब लड़ाई के लिए जा रहे थे तब सभी भारतवासी जोश के साथ सैनिकों का सम्मान कर रहे थे । जगह-जगह ट्रेन रोक करके उन्हें शाँल और फल भेंट कर रहे थे। बहने तिलक कर राखी बांध रही थी । युद्ध काल में जो सैनिकों का सम्मान होता है शांति काल में देशवासी भूल जाते हैं।

श्री हरवंश त्रिवेदी जी , श्री जगदीश प्रसाद अवस्थी जी ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष चंद्र प्रकाश शर्मा , उपाध्यक्ष अशोक कुमार शर्मा, वेटरन कैलाश सिंह जादौन, श्री हरिवंश त्रिवेदी श्री जगदीश प्रसाद अवस्थी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम का संचालन कैलाश सिंह जादौन और श्री हरवंश त्रिवेदी जी ने आभार व्यक्त किया।