SHIVPURI NEWS - पारा 40 के पार, मई-जून की मौसम की झलक देखने को मिली, पढिए पूरी खबर

Bhopal Samachar

शिवपुरी। शिवपुरी जिला मार्च के अंतिम दिनो में तपने लगा है,पिछले 5 दिनों में तापमान ने लगातार उछाल मारा है। इस कारण मई जून जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है हालांकि अभी राते नही तप रही है इस कारण लोगों में थोड़ी राहत है।
 
जानकारी के मुताबिक शिवपुरी शहर में गुरुवार को अधिकतम तापमान 40 डिग्री व न्यूनतम 22.7 डिग्री सेल्सियस रहा। वही बुधवार को पारा 40 डिग्री के पास ही रहा है। बीते मंगलवार को अधिकतम तापमान 39 डिग्री व न्यूनतम 20.2 डिग्री सेल्सियस था।

पिछले 23 मार्च की तुलना में अधिकतम पारे में 4.4 डिग्री का उछाल दर्ज किया गया है। न्यूनतम पारे में भी इससे ज्यादा उछाल आया है। तापमान को देखते हुए एसी और कूलर चलना शुरू हो गए हैं। तापमान बढ़ने की वजह से बिजली खपत भी बढ़ना लाजमी है। वहीं फसलों की बात करें तो गेहूं फसल भी तेजी से पकना शुरू हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान यदि 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है, तो गेहूं की उपज में भारी गिरावट आ सकती है।

गर्म हवाएं फसलों की वृद्धि को रोक रही हैं और दानों की गुणवत्ता पर असर डाल रही हैं। किसान लगातार फसलों में सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन अत्यधिक गर्मी के कारण नमी जल्दी खत्म हो रही है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे सिंचाई की मात्रा बढ़ाएं और खेतों में नमी बनाए रखें।

अप्रैल से शुरू होगी लू चलना

मार्च की विदाई के बाद अप्रैल माह से लू चलने की संभावना बढ़ जाएगी। जिससे तापमान में भी वृद्धि होगी। मौसम विभाग के अनुसार अभी अगले 48 से 72 घंटे तक ताप में 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट देखने को मिलेगी, इसके बाद तापमान में वृद्धि शुरू होगी। मौसम वैज्ञानिक ने अप्रैल माह के शुरूआती दौर में तापमान में बढ़ोतरी होने की संभावना ई है।

मटकों की बिक्री बढ़ी

बढ़ती गर्मी की वजह से बाजार में मटकों की बिक्री एकाएक बढ़ गई है। शहर की मुख्य सडकों के किनारे बिक रहे मटके लोगों की पसंद बन गए हैं। विक्रेताओं ने इनकी कीमत भी 70 से 150 रुपए तक तय की है। बाजार में कई प्रकार के मटके बिकने आए हैं। जिसमें टोंटी वाले मटके की मांग अधिक है। मटका विक्रेता सावित्री का कहना है कि जैसे जैसे गर्मी तेज होगी वैसे वैसे मटकों की मांग बढ़ेगी। जिससे इनकी कीमतों में भी वृद्धि हो जाएगी, क्योंकि अधिकतर लोग मटकों का ही पानी पीते हैं।