SHIVPURI NEWS- हाईकोर्ट पहुंचा करैरा विधायक प्रागीलाल जाटव का दो पत्नियों वाला मामला-चुनाव से पहले बना मुद्दा

Bhopal Samachar
शिवपुरी। करैरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक प्रागीलाल जाटव अब कानून अपराध में फंस सकते है, उन्होंने अपना नामांकन फार्म भरते समय एक ही पत्नी का ज़िक्र किया था जबकि आरोप है कि प्रागीलाल जाटव की एक नहीं बल्कि दो पत्नियां है। इस मामले में अब चुनाव नजदीक होने के चलते विधायक प्रागीलाल की परेशानियां बढ़ गई है। इस मामले में ग्वालियर निवासी एक युवक के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई है जिसमें विधायक पर दो शादियां करने के आरोप लगाए गए है।

जानकारी के अनुसार ग्वालियर निवासी नवीन सिंह के द्वारा करैरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक प्रागी लाल जाटव के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई है जिसमें आरोप लगाते हुए बताया गया है कि विधायक प्रागीलाल जाटव ने वर्ष 2020 के विधानसभा उप चुनाव के समय प्रत्याशी के रूप में रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष आवेदन के साथ शपथ पत्र में अपने जीवन का आय व्यय परिवार की पोजीशन, न्यायालय में चल रहे मुकदमों का हवाला चुनाव आयोग को दिया था।

जिसमें विधायक प्रागीलाल जाटव के द्वारा भी उक्त जानकारी दी गई लेकिन इस जानकारी को लेकर ग्वालियर निवासी युवक नवीन सिंह के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करते हुए विधायक प्रागीलाल जाटव के विरूद्ध दो शादियां करने के आरोप लगाए गए और बताया कि करैरा विधायक की दो पत्नियां मिथिला जाटव और रामदुलारी जाटव है, आरोप को प्रमाणिक करने के लिए वोटर कार्ड और समग्र आईडी भी पेश की गई है।

इस याचिका में बताया गया है कि दो पत्नियों की जानकारी छिपाते हुए प्रागीलाल जाटव के द्वारा झूठा शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया। ऐसे में विधायक प्रागीलाल जाटव के खिलाफ विधि अनुसार कार्यवाही होना चाहिए। इसके संबंध में याचिकाकर्ता के द्वारा बीती 14 अगस्त को चुनाव आयोग में शिकायत की गई है जबकि माननीय उच्च न्यायालय में भी अगस्त माह में यह शिकायत दर्ज कर कार्यवाही की मांग की गई है।

बताया गया है कि यदि याचिका में लिखी गई इवारत सत्य है तो जिस व्यक्ति के खिलाफ दायर याचिका के आधार पर अयोग्य घोषित की जाती है तो उसमें करैरा विधायक के खिलाफ याचिका में दो पत्नियां का स्पष्ट उल्लेख किया गया है और सिद्ध पाई गई तो सुनिश्चितता अयोग्य घोषित होगा हो सकता है, अपने विधायक कार्यकाल के दौरान शासन से जितनी सुख सुविधाएं ली गई है कोर्ट रिकवरी का भी आदेश देने सक्षम है। क्योंकि कोर्ट अज्ञानता की गलती माफ कर सकती है पर ज्ञान होते हुए अज्ञान बनना अपराध से भी बड़ा अपराध होता है वो भी एक जनप्रतिनिधि द्वारा स्वयं संज्ञान में होते हुए भी छिपाना यह भी हो सकता है जनप्रतिनिधि को पेंशन पर रोक लगा दे।