शिवपुरी। देश के सुप्रसिद्ध जैनाचार्य कुलचंद्र सूरीश्वरजी महाराज ने दीपावली त्यौहार से पूर्व 11 दिन की मौन.एकांत मंत्र और जप साधना की। साधना की परिपूर्णता के पश्चात आज सुबह सवा 8 बजे आचार्य श्री अपनी कुटिया से बाहर आए। उस समय उनके दर्शनों के लिए पार्श्वनाथ जैन मंदिर में बड़ी संख्या में जनसैलाब उमड़ा था।
आचार्य श्री के दर्शनों के लिए भक्तगण लालायित हो रहे थे। उन्हें प्रथम दर्शन का सौभाग्य किसे मिलेघ् इसकी लालसा में सभी भक्तगण थे। आचार्य श्री के प्रथम दर्शन के लिए भक्तगण बोली लगा रहे थे। प्रथम दर्शन के लिए व्यवसायी सुनील सांड ने 1 लाख 5 हजार रुपए की बोली ली और उन्होंने सपरिवार सबसे पहले आचार्य श्री का दर्शन और वंदन किया।
आचार्य श्री ने उन्हें वाकक्षेप प्रदान किया और भगवान पार्श्वनाथ की मूर्ति भेंट की। भक्तगण आचार्य कुलचंद्र सूरि जी की जय.जयकार के नारे लगा रहे थे। इसके पश्चात आचार्य कुलचंद्र सूरि जी ने पाश्र्वनाथ जैन मंदिर के दर्शन कर सभी भक्तों को आर्शीवाद दिया। इसके बाद उन्होंने सभी भक्तजनों को मांगलिक का लाभ दिया।
इस अवसर पर पंन्यास प्रवर कुलदर्शन विजय जी, संत कुलरक्षित विजय जी, संत कुलधर्म विजय जीए पूज्य साध्वी शासन रत्ना श्री जीए साध्वी अक्षय नंदिता श्री जी सहित साध्वी मंडल, चार्तुमास कमेटी के संयोजक तेजमल सांखलाए उप संयोजक मुकेश भांडावत और प्रवीण लगाए, श्वेताम्बर जैन समाज के अध्यक्ष दशरथ मल सांखला, प्रसिद्ध अभिभाषक विजय तिवारी, समाजसेवी महेंद्र गोयल, ललित मोहन गोयल सहित अनेकों जैन और अजैन श्रावक श्राविकाएं बड़ी संख्या में उपस्थित थीं।
जैन दर्शन में दीपावली पर्व का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। दीपावली के अवसर पर तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जहां मोक्ष गमन हुआ था, वहीं इस त्यौहार पर भगवान महावीर स्वामी के प्रथम शिष्य गौतम स्वामी को केवल कल्याणक की प्राप्ति हुई थी। इस कारण दीपावली त्यौहार के पूर्व तप और जप आराधना का विशेष महत्व है।
शिवपुरी मेें चातुर्मास कर रहे आचार्य कुलचंद्र सूरि जी ने 11 दिन पूर्व अपनी मौन.एकांत मंत्र साधना प्रारंभ की। इस हेतु वह मंदिर के उपासरे में निर्मित अपनी कुटिया में साधनारत रहे। इस दौरान वह किसी से भी नहीं मिले। जैन मंदिर में भी भगवान के दर्शन करने के लिए वह ब्रह्बेला में तब जाते थे तब कोई नहीं रहता था।
आश्चर्य श्री की जाप साधना की परिपूर्णता आज धनतेरस के अवसर पर हुई। उनके दर्शनों के लिए भक्तगण सुबह से ही मंदिर के उपासरे में एकत्रित हो गए थे। इनमें जैन समाज के अलावा जैन समाज के लोग भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे और वे लगातार जैन धर्म तथा आचार्य श्री की जय.जयकार के नारे लगा रहे थे।
वहां उपस्थित जैन संत और साध्वीगण निरंतर भक्त गणों को प्रोत्साहित कर रहीं थीं। आचार्य श्री के प्रथम दर्शन के सौभाग्य हेतु बोली लगाने का सिलसिला प्रारंभ हुआ और 81 हजार पर जाकर बोली थम गई। उस समय समाजसेवी महेंद्र गोयल ने 1 लाख 1 हजार रुपए की बोली लगाई। जिसकी वहां उपस्थित लोगों ने सराहना की। हालांकि बाद में 1 लाख 5 हजार रूपए की बोली लगाकर सुनील सांड प्रथम दर्शन के लाभार्थी बने। उन्होंने तथा उनके परिवार ने सबसे पहले आचार्य श्री से आर्शीवाद ग्रहण किया।
धनतेरस पर सामूहिक श्री महालक्ष्मीदेवी का हुआ पूजन
पाश्र्वनाथ श्वेताम्बर जैन मंदिर के उपासरे में आचार्य श्री कुलचंद्र सूरि जी और पंन्यास प्रवर कुलदर्शन विजय जी की निश्रा में धनतेरस के अवसर पर सामूहिक श्री महालक्ष्मी देवी का महापूजन हुआ। जिसमें बड़ी संख्या में धर्मावलंबियों ने भाग लिया। सामूहिक श्री महालक्ष्मी देवी पूजन के लाभार्थी तेजमल जी.मोहिनी सांड परिवार रहे।